life of an innocent child suffering from sickle cell danger



Last Updated:May 13, 2025, 13:28 ISTसरस्वती की पारिवारिक स्थिति भी बेहद दयनीय है. कुछ साल उसकी मां का निधन हो चुका है और पिता हत्या के आरोप में लंबे समय से जेल में बंद है. ऐसी विषम परिस्थितियों में, सरस्वती की देख-रेख की जिम्मेदारी उसकी मात्र 18 …और पढ़ेंX

बहनों की दर्दभरी कहानीहाइलाइट्ससरस्वती को कोरबा मेडिकल कॉलेज में नया जीवनदान मिला.सरस्वती की देखरेख की जिम्मेदारी उसकी बहन कोयल पर है.सरस्वती और कोयल को समाज के सहयोग की सख्त जरूरत है.कोरबा:- सिकलसेल एनीमिया से पीड़ित 7 वर्षीय सरस्वती साहू की जान खतरे में थी. लेकिन कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मिले त्वरित इलाज और रक्तदान ने उसे एक नया जीवनदान दिया है. दीपिका क्षेत्र के ज्योति नगर निवासी सरस्वती लंबे समय से इस गंभीर बीमारी से जूझ रही है. हाल ही में जब उसकी हालत अत्यंत गंभीर हो गई, तो उसके शरीर में मात्र 3 ग्राम खून ही बचा था.

ऐसे में अस्पताल प्रबंधन और समाजसेवियों के सहयोग से रक्त की व्यवस्था की गई और उसे तत्काल चिकित्सा मुहैया कराया गया. सरस्वती इन दिनों कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देख-रेख में उसका इलाज जारी है.

कबाड़ बीनकर कर रही बहन का पालन-पोषणसरस्वती की पारिवारिक स्थिति भी बेहद दयनीय है. कुछ साल उसकी मां का निधन हो चुका है और पिता हत्या के आरोप में लंबे समय से जेल में बंद है. ऐसी विषम परिस्थितियों में, सरस्वती की देख-रेख की जिम्मेदारी उसकी मात्र 18 वर्षीय बहन कोयल साहू के कंधों पर आ गई है. कोयल कबाड़ बीनकर अपनी छोटी बहन का पालन-पोषण कर रही है.

सरकारी योजना का नहीं मिल पा रहा लाभकोयल ने बताया कि इस कठिन परिस्थिति में उन्हें अस्पताल प्रबंधन का भी पूरा सहयोग मिल रहा है. लेकिन राशन कार्ड बनवाने के लिए जरूरी केवाईसी प्रक्रिया माता-पिता के अभाव में संभव नहीं हो पा रही है, जिससे भोजन की व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. कोयल ने बताया कि केवाईसी के अभाव में उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में भी दिक्कत आ रही है, जिससे सरस्वती के इलाज और पोषण में बाधा उत्पन्न हो रही है.

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संघर्ष से भरी है कहानीसरस्वती की कहानी एक ऐसी बच्ची की कहानी है, जो जीवन के लिए संघर्ष कर रही है. यह समाज की संवेदनशीलता और एकजुटता की आवश्यकता को भी उजागर करती है. इस मुश्किल घड़ी में, सरस्वती और कोयल को समाज के सहयोग की सख्त जरूरत है, ताकि सरस्वती को बेहतर इलाज मिल सके और कोयल अपनी छोटी बहन का भरण-पोषण कर सके. यह मामला स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के ध्यान में लाना भी आवश्यक है, ताकि सरस्वती और कोयल को राशन कार्ड बनवाने और अन्य आवश्यक सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद की जा सके.
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