नरसिंह जयंती आज मनाई जा रही है. हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरसिंह जयंती का व्रत किया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस तिथि पर भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया था और खंभे को चीरकर भक्त प्रह्वाद की रक्षा की थी. भगवान विष्णु ने यह अवतार हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए किया था. मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन व्रत रखकर विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कुंडली में ग्रह-नक्षत्रों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति भी मिलती है. आइए जानते हैं नरसिंह जयंती पूजा विधि, पूजा मुहूर्त, महत्व…
नरसिंह जयंती का महत्वपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरसिंह अवतार भगवान विष्णु का चौथा अवतार है और यह नर और सिंह के रूप में मिलकर लिया था. यह अवतार लेकर भगवान विष्णु ने यह संदेश दिया कि जो ईश्वर में अटूट विश्वास रखते हैं, उनको कोई हानि नहीं पहुंचा सकता है. भगवान नरसिंह ने खंभे को चीरकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी. इस दिन विधि विधान के साथ भगवान नरसिंह की पूजा अर्चना करने से जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं और कुंडली में अगर कोई ग्रह दोष है तो वह भी दूर हो जाएगा. यह जयंती अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है.
नरसिंह जयंती 2025 आजचतुर्दशी तिथि का प्रारंभ – 10 मई, शाम 5 बजकर 30 मिनट सेचतुर्दशी तिथि का समापन – 11 मई, रात 8 बजकर 2 मिनट तकभगवान विष्णु ने नरसिंह का अवतार शाम के समय लिया था इसलिए यह पर्व 11 मई यानी आज मनाया जा रहा है.
पूजा का शुभ मुहूर्त – आज शाम 4 बजकर 21 मिनट से 7 बजकर 4 मिनट तक
नरसिंह जयंती 2025 पूजा विधिआज ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान ध्यान से निवृत होकर पूजा अर्चना करें और व्रत का संकल्प लें. एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गंगाजल से छिड़काव करें. फिर भगवान नरसिंह और माता लक्ष्मी की मूर्ति, तस्वीर, पोस्टर रख लें और फिर कुमकुम, अक्षत, फल, फूल, नैवेघ अर्पित करें. साथ अबीर, गुलाल और रोली जैसी चीजें अर्पित कर दें और घी का दीपक जलाएं. इसके बाद नैवेद्यं शर्करां चापि भक्ष्यभोज्यसमन्वितम्। ददामि ते रमाकांत सर्वपापक्षयं कुरु।। मंत्र का जप करें और कथा का पाठ करें. इस दिन दान करने का भी विशेष महत्व है और शाम के समय आरती करें.
नरसिंह भगवान की आरतीॐ जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरे ।स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,जनका ताप हरे ॥ॐ जय नरसिंह हरे ॥तुम हो दिन दयाला,भक्तन हितकारी,प्रभु भक्तन हितकारी ।अद्भुत रूप बनाकर,अद्भुत रूप बनाकर,प्रकटे भय हारी ॥ॐ जय नरसिंह हरे ॥सबके ह्रदय विदारण,दुस्यु जियो मारी,प्रभु दुस्यु जियो मारी ।दास जान आपनायो,दास जान आपनायो,जनपर कृपा करी ॥ॐ जय नरसिंह हरे ॥ब्रह्मा करत आरती,माला पहिनावे,प्रभु माला पहिनावे ।शिवजी जय जय कहकर,पुष्पन बरसावे ॥ॐ जय नरसिंह हरे ॥