पाकिस्तान के आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना का ऑपरेशन सिंदूर दुनियाभर में चर्चा का विषय बना है. ऑपरेशन सिंदूर से दुश्मनों में खौफ का माहौल है. सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है. सफल ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में हमने हनुमान जी के आदर्श का पालन किया. अशोक वाटिका उजाड़ने के बाद हनुमान जी ने कहा था, ‘जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारा.’ भारतीय सेना ने केवल उन्हीं को मारा है, जिन्होंने हमारे मासूम लोगों को मारा. तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में रामायण काल की इस घटना का वर्णन सुंदरकांड में किया है. सुंदरकांड में हनुमान जी के पराक्रम का वर्णन है, जिसमें वे माता सीता से मिलने के बाद लंका का दहन करते हैं.
भूख मिटाने के लिए अशोक वाटिका में पहुंचे वीर हनुमानमाता सीता का पता लगाने के लिए हनुमान जी समुद्र को लांघकर लंका पहुंचे थे, जहां पर वे अशोक वाटिका में माता सीता से मिले और प्रभु राम का संदेश दिया. उसके बाद वे माता सीता से आज्ञा लेकर अशोक वाटिका में फल खाने के बहाने पहुंच गए और उसे तहस-नहस करने लगे. जब रखवालों ने इसकी सूचना रावण को दी, तो उसने राक्षस योद्धाओं को हनुमान जी को पकड़कर लाने का आदेश दिया.
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हनुमान जी ने किया राक्षसों का वध, अक्षय कुमार को भी मारारावण का बेटा अक्षय कुमार अपनी सेना के साथ हनुमान जी को पकड़ने आया, तो हनुमान जी ने उसका वध कर दिया. उसके साथ और भी राक्षस मारे गए. बेटे के मारे जाने की सूचना पाकर रावण बौखला गया और अपने बलशाली बेटे मेघनाद को अशोक वाटिका में भेजा. उसने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करके हनुमान जी को बांध लिया और रावण के सामने पेश किया.
तुमने राक्षसों को किस अपराध के लिए माराहनुमान जी को देखकर रावण हंसने लगा. उसने हनुमान जी से पूछा कि हे वानर! तुमने किस के बल पर अशोक वाटिका को उजाड़ दिया? क्या तुमने रावण का नाम नहीं सुना है? मारे निसिचर केहिं अपराधा, कहु सठ तोहि न प्रान कई बाधा। रावण ने हनुमान जी से पूछा कि तुमने इन राक्षसों को किस अपराध के लिए मारा है? क्या तुमको अपने प्राणों का डर नहीं है?
सुनु रावन ब्रह्मांड निकाया। पाइ जासु बल बिरचित माया।।रावण के इन बातों पर हनुमान जी ने कहा कि हे रावण सुन, माया जिनकी शक्ति को पाकर संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना करती है. जिनके बल से ब्रह्मा, विष्णु और महेश सृृष्टि का सृजन, पालन और संहार करते हैं, जिनके बल से शेषनाग पूरी पृथ्वी को अपने फण पर धारण करते हैं, जो देवताओं की रक्षा के लिए अनेक प्रकार के शरीर धारण करते हैं, तुम्हारे जैसे मूर्खों को शिक्षा देते हैं, शिव धनुष को तोड़ डाला और समस्त राजाओं के घमंड को भी तोड़ डाला. खर, दूषण, बालि को मार डाला, जिनके लेश मात्र बल से तुमने समस्त जगत को जीत लिया. जिनकी प्रिय पत्नी का तुम हरण करके ले आए, मैं उन्हीं का दूत हूं.
जानउ मैं तुम्हरि प्रभुताई। सहसबाहु सन परी लराई।।समर बालि सन करि जसु पावा। सुनि कपि बचन बिहसि बिहरावा।।हनुमान जी ने रावण से कहा कि मैं तुम्हारी प्रभुता को जानता हूं. सहस्रबाहु से तुम्हारी लड़ाई हुई, बालि से लड़कर तुम को यश प्राप्त हुआ. हनुमान जी की बात सुनकर रावण हंसा और बात टाल दिया.
जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे। तेहि पर बांधेउ तनय तुम्हारे।।मोहि न कछु बांधे कई लाजा। कीन्ह चहउ निज प्रभु कर काजा।।हनुमान जी ने रावण से कहा कि उनको भूख लगी थी, तो फल खाए और वानर स्वभाव के कारण पेड़ तोड़ दिए. शरीर सबको प्रिय होता है. जब राक्षस मुझे मारने लगे, तो मैंने उनको मारा, जो मुझे मार रहे थे. इस पर तुम्हारे पुत्र ने मुझे बांध दिया. मुझे बांध जाने से कोई शर्म नहीं है, मैं तो अपने प्रभु का काम करना चाहता हूं.
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बिनती करि हाथ जोरि कर रावन। सुनहु मान तजि मोर सिखावन।।देखहु तुम्ह निज कुलहि बिचारी। भ्रम तजि भजहु भगत भय हारी।।हनुमान जी ने रावण को समझाते हुए कहा कि हे रावण! मैं हाथ जोड़कर विनती करता हूं, तुम अभिमान छोड़कर मेरी बात सुनो. तुम अपने पवित्र कुल के बारे में सोचकर देखो, भ्रम को छोड़कर भगवान के नाम का भजन करो.
जाकें डर अति काल डेराई। जो सुर असुर चराचर खाई।।तासों बयरु कबहु नहिं कीजै। मोरे कहें जानकी दीजै।।हनुमान जी ने रावण से कहा कि जो देवता, राक्षस और समस्त चराचर जगत को खा जाता है, वह काल भी जिनके डर से अत्यंत डरता है, उनसे तुम कदापि शत्रुता मत करो, मेरे कहने से जानकी जी को दे दो. भगवान रघुनाथ जी दयालु हैं, उनके शरण में जाने पर वे तुम्हारे अपराध को भूलकर शरण में रख लेंगे.
सुनु दसकंठ कहउ पन रोपी। बिमुख राम त्राता नहीं कोपि।।संकर सहस बिष्नु अज तोहि। सकहिं न राखि राम कर द्रोहि।।हे रावण! जो प्रभु राम से विमुख हो जाता है, उसकी रक्षा करने वाला कोई नहीं है. हजारों ब्रह्मा, विष्णु और शंकर भी भगवान राम के साथ द्रोह करने वाले तुमको बचा नहीं सकते हैं.