साल 2025 का दूसरा शनि प्रदोष ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को है. हर माह में दो प्रदोष व्रत आते हैं. इस बार का प्रदोष व्रत शनिवार को होगा, इसलिए यह शनि प्रदोष है. शनि प्रदोष के दिन शिव पूजा के लिए 1 घंटा 54 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है. उज्जैन के महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी बताते हैं कि शनि प्रदोष व्रत और शिव पूजा करने से पुत्र की प्राप्ति होती है. वो भी कृष्ण पक्ष का शनि प्रदोष महत्वपूर्ण होता है. आइए जानते हैं कि शनि प्रदोष कब है? शनि प्रदोष की पूजा का मुहूर्त क्या है?
साल का दूसरा शनि प्रदोष 2025 तारीखदृक पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी तिथि 24 मई दिन शनिवार को शाम 7 बजकर 20 मिनट से शुरू होगी और यह तिथि 25 मई दिन रविवार को दोपहर 3 बजकर 51 मिनट पर खत्म होगी. उदयातिथि के आधार पर त्रयोदशी तिथि 25 मई को है, लेकिन प्रदोष के पूजा मुहूर्त के अनुसार शनि प्रदोष व्रत 24 मई को रखा जाएगा.
शनि प्रदोष 2025 मुहूर्त24 मई को शनि प्रदोष की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 20 मिनट से है, जो रात 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. इस समय शिव भक्तों को पूजा कर लेनी चाहिए. शनि प्रदोष की पूजा के लिए आपको 1 घंटा 54 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा प्रदोष काल में ही करते हैं. प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद से प्रारंभ होता है.
शनि प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:04 ए एम से 04:45 ए एम तक है, वहीं उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक है. वहीं निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से देर रात 12 बजकर 38 मिनट तक है.
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सौभाग्य योग में शनि प्रदोष पूजा 2025इस बार शनि प्रदोष व्रत की पूजा सौभाग्य योग में की जाएगी. शनि प्रदोष के दिन आयुष्मान योग और सौभाग्य योग बनेंगे. आयुष्मान योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 3 बजकर 1 मिनट तक रहेगा, उसके बाद सौभाग्य योग बनेगा, जो अगले दिन तक रहेगा. शनि प्रदोष पर रेवती और अश्विनी नक्षत्र हैं. रेवती नक्षत्र सुबह से लेकर दोपहर 01 बजकर 48 मिनट तक है, उसके बाद से अश्विनी नक्षत्र है.
शनि प्रदोष पर दोपहर तक अग्नि पंचकशनि प्रदोष के दिन अग्नि पंचक है. व्रत के दिन अग्नि पचंक सुबह 5 बजकर 26 मिनट से दोपहर 1 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. अग्नि पंचक में अग्नि का भय रहता है.
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शनि प्रदोष पर रुद्राभिषेक के फायदेशनि प्रदोष के दिन शिववास नंदी पर है, जो सुबह से लेकर शाम 07 बजकर 20 मिनट तक रहेगा. उसके बाद शिववास भोजन में होगा. शिववास जब नंदी पर होता है तो उस समय रुद्राभिषेक करने पर व्यक्ति को कार्यों में सफलता प्राप्त होती है. भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
शनि प्रदोष व्रत का महत्वशिव पुराण और अन्य पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनि प्रदोष का व्रत करने से पुत्र की प्राप्ति होती है और संतान दोष मिटता है. नि:संतान दंपत्तियों को शनि प्रदोष का व्रत जरूर करना चाहिए. वैसे प्रदोष व्रत करने से रोग, दोष, कष्ट आदि मिटते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.