शनि प्रदोष व्रत 24 मई शनिवार को है. यह ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत है. शनिवार को होने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष के नाम से जानते हैं. पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग शनि प्रदोष व्रत रखकर शिव पूजा करते हैं और कथा सुनते हैं, उनको पुत्र की प्राप्ति होती है. इस बार शनि प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 1 घंटा 54 मिनट का है. उस दिन सौभाग्य योग में प्रदोष व्रत की पूजा की जाएगी. उज्जैन के महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी से जानते हैं शनि प्रदोष की व्रत कथा और मुहूर्त के बारे में.
शनि प्रदोष व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक सेठ का परिवार रहता था. उनके पास किसी भी प्रकार के सुख और सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी. लेकिन सेठ और उसकी पत्नी काफी दुखी रहते थे क्योंकि उनकी कोई संतान नहीं थी. सेठ को इस बात की चिंता थी कि उसका वंश आगे कैसे बढ़ेगा. एक दिन सेठ और सेठानी ने विचार किया और अपना सारा कामकाज अपने नौकरों को सौंप दिया.
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इसके बाद सेठ और सेठानी तीर्थयात्रा पर निकल गए. नगर से कुछ दूर बाहर निकलने पर उनको एक साधु मिले, जो ध्यान लगाए बैठे थे. सेठ के मन में आया कि क्यों न इस साधु के दर्शन करके आशीर्वाद ले लें और फिर तीर्थयात्रा पर आगे बढ़ें. वे सेठानी को साथ लेकर साधु के पास गए और उनके पास जाकर बैठ गए.
काफी समय बीत जाने के बाद साधु ध्यान की मुद्रा से बाहर आए तो उनको लगा कि सेठ और सेठानी काफी समय से उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं. उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं. आज्ञा पाकर सेठ और सेठानी ने साधु को प्रणाम किया और अपने बारे में जानकारी दी. उन्होंने सेठ और सेठानी से कहा कि वे उनके कष्ट को जानते हैं. इसका सबसे आसान उपाय है शनि प्रदोष का व्रत. तुम दोनों विधि विधान से शनि प्रदोष का व्रत रखो. तुम पर महादेव की कृपा होगी और संतान की प्राप्ति होगी.
उसके बाद उस साधु ने सेठ और सेठानी को शनि प्रदोष व्रत की विधि बताई. सेठ और सेठानी इस उपाय को जानकर बेहद खुश हुए. वे दोनों साधु का आशीर्वाद लेकर खुशी खुशी तीर्थ यात्रा पर चले गए. वहां से लौटकर आने के बाद उन दोनों ने विधि विधान से शनि प्रदोष का व्रत रखा. दान और दक्षिणा दिया. भगवान शिव की कृपा से सेठ और सेठानी को पुत्र की प्राप्ति हुई.
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इस प्रकार से जो भी शनि प्रदोष का व्रत रखकर शिव पूजा करेगा, शनि प्रदोष की व्रत कथा सुनेगार, निश्चित ही उसे शिव कृपा प्राप्त होगी. उसे भी संतान सुख का सौभाग्य प्राप्त होगा.
शनि प्रदोष व्रत मई 2025 मुहूर्त
ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी तिथि का शुभारंभ: 24 मई, शनिवार, 7:20 पीएम सेज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी तिथि का समापन: 25 मई, रविवार, 3:51 पीएम परशनि प्रदोष पूजा का मुहूर्त: शाम 7:20 बजे से रात 9:13 बजे तकनिशिता मुहूर्त: देर रात 11:57 पीएम से 12:38 एएम तकसौभाग्य योग: दोपहर 3 बजकर 1 मिनट से रात तक