Shukra Pradosh Vrat May 2025 Date muhurat ravi yog importance : मई का पहला प्रदोष कब है? जानें तारीख, मुहूर्त और महत्व



मई का पहला प्रदोष व्रत वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को है. यह व्रत शुक्रवार को होने की वजह से शुक्र प्रदोष व्रत होगा. प्रदोष व्रत को पूरे दिन व्रत रखते हैं और शाम के समय में भगवान शिव की पूजा की जाती है. इस व्रत को करने से सभी प्रकार के दोष मिट जाते हैं और शिव कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. उज्जैन के महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी बताते हैं कि शुक्र प्रदोष व्रत के दिन वज्र योग और हस्त नक्षत्र का संयोग बनेगा. शाम की पूजा के लिए 2 घंटे से अधिक का समय मिलेगा. आइए जानते हैं कि मई का पहला प्रदोष व्रत कब है? प्रदोष पूजा का मुहूर्त क्या है? प्रदोष व्रत में शिव पूजा शाम को क्यों करते हैं?

2025 मई का पहला प्रदोष किस दिन है?दृक पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि 9 मई दिन शुक्रवार को दोपहर में 2 बजकर 56 मिनट से शुरू हो रही है और यह 10 मई शनिवार को शाम 5 बजकर 29 मिनट तक रहेगी. इस व्रत की तारीख के लिए शाम की पूजा का मुहूर्त देखते हैं. ऐसे में मई का पहला प्रदोष 9 मई शुक्रवार को रखा जाएगा. यह शुक्र प्रदोष व्रत होगा.

शुक्र प्रदोष व्रत 2025 मुहूर्तशुक्र प्रदोष के दिन शिव पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 7 बजकर 1 मिनट से है, जो रात 9 बजकर 8 मिनट तक रहेगा. यदि आप शुक्र प्रदोष का व्रत रखना चाहते हैं तो आपको शिव पूजा इस मुहूर्त में ही करनी चाहिए. वैसे किसी कारणवश इस समय न कर पाएं तो अपनी सुविधानुसार समय का चुनाव कर लें.

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शुक्र प्रदोष पर ब्रह्म मुहूर्त 04:10 ए एम से 04:52 ए एम तक है. उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:51 बजे से दोपहर 12:45 पी एम तक है. निशिता मुहूर्त 11:56 पी एम से देर रात 12:38 ए एम तक रहेगा.

वज्र योग और हस्त नक्षत्र में शुक्र प्रदोष व्रत 2025इस बार का शुक्र प्रदोष व्रत वज्र योग और हस्त नक्षत्र में है. वज्र योग पूरे दिन है. यह 10 मई को 02:58 ए एम तक बनेगा, उसके बाद से सिद्धि योग होगा. व्रत वाले दिन हस्त नक्षत्र सुबह से लेकर देर रात 12:09 ए एम तक है, उसके बाद से चित्रा नक्षत्र है. प्रदोष को देर रात 12:09 ए एम पर रवि योग बनेगा, जो 10 मई को 05:33 ए एम तक रहेगा.

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शाम को क्यों करते हैं प्रदोष व्रत की पूजा?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत यानि त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल में यानि सूर्यास्त के बाद जब अंधेरा होने लगता है, उस समय में भगवान शिव प्रसन्न होकर कैलाश पर नृत्य करते हैं. कहा जाता है कि जब कोई प्रसन्न हो तो उससे आप जो मांगेंगे, वो मिल सकतर है, इसलिए प्रदोष व्रत में शाम के समय पूजा करने का विधान है.

प्रदोष व्रत का महत्वपौराणिक कथाओं के अनुसार, जब चंद्रदेव को क्षय रोग हुआ था, तब उन्होंने भगवान शिव की पूजा की. शिव कृपा से उनके सभी प्रकार के दोष मिट गए. ऐसे ही जो लोग प्रदोष व्रत रखते हैं, भगवान भोलेनाथ उनके दुखों को दूर कर देते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है.



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