Last Updated:May 20, 2025, 18:37 ISTरोहित शर्मा और विराट कोहली के रिटायरमेंट के बाद भारतीय टेस्ट टीम की बल्लेबाजी अचानक अनुभवहीन नजर आने लगी है ऐसे में इंग्लैंड को उसी की सरजमीं पर हराने के लिए बीसीसीआई शॉर्ट टर्म प्लान पर काम करते हुए अजिंक्य रह…और पढ़ेंअजिंक्य रहाणे की टीम में हो सकती है वापसी, मिडिलऑर्डर में चाहिए अनुभव हाइलाइट्सअजिंक्य रहाणे की कप्तानी में वापसी संभव.रहाणे ने 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीती थी.इंग्लैंड दौरे पर अनुभव की कमी पूरी कर सकते हैं रहाणे.नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट को समझने वाले ये जानते है कि यहां पर कुछ भी हो सकता है. समय समय पर कई अप्रत्याशित फैसले भारतीय क्रिकेट ने लिए है पर क्या इस बार वो शुभमन गिल, के एल राहुल और ऋषभ पंत के इतर शॉर्ट टर्म प्लान पर काम कर सकते है ये देखना बहुत दिलचस्प होगा. अजिंक्य रहाणे की वापसी को कोई भी इसे लांग टर्म सोल्यूशन के रूप में नहीं देखेगा, लेकिन क्या अजिंक्य रहाणे की वापसी इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला में भारत की संभावनाओं को बढ़ा सकती है खासकर विराट कोहली और रोहित शर्मा के संन्यास के बाद टीम में अनुभव की इतनी कमी है.
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि सेलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट मुडॉ पीछे मुड़कर देखने का नहीं है. लेकिन विराट कोहली और रोहित शर्मा के न होने पर, क्या रहाणे की तरफ देखना सही प्लान होगा . सच्चाई यह है कि वह उतने बूढ़े नहीं हैं, जितना बताया जा रहा है. उनकी उम्र में कई लोग खेल चुके हैं और ऐसा करना जारी रखते हैं. जो कोई आईपीएल के व्यस्त शेड्यूल को झेल सकता है, उसके लिए उसकी फिटनेस पर कोई संदेह नहीं है. उन्होंने तीन साल तक लगातार घरेलू क्रिकेट खेला है और उसी समयावधि में रणजी और ईरानी ट्रॉफी भी जीती है. रहाणे ने हाल में एक शब्द कहा कि “लाल गेंद क्रिकेट मेरे लिए दुनिया का मतलब है उनकी मंशा को बताता जरूर है.
कप्तानी के रण में टिक पाएंगे रहाणे ?
अजिंक्य रहाणे नाम जेहन में आते ही एक मजबूत लीडर सामने नजर आता है जिसकी अगुआई में टीम इंडिया ने 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया को उनके घऱ में घुस कर मारा था. रहाणे ड्रेसिंग रूम में भी एक महत्वपूर्ण उपस्थिति हो सकते हैं, और अगर उन्हें अंततः कप्तान बनाया जाता है तो शुभमन गिल जैसे युवा कप्तान की मदद कर सकते हैं.जब रहाणे टीम में आए तो वो अपने करियर में 62 की औसत से 23 प्रथम श्रेणी शतक बनाए थे. यह कोई आश्चर्य की बात नहीं थी कि वह चुनौती के लिए तैयार थे और हमेशा से रहे हैं. टेस्ट क्रिकेट में उनकी शुरुआत कठिन थी, उसके बाद की यात्रा भी आसान नहीं थी. जनवरी 2018 में दक्षिण अफ्रीका में उन्हें फिर से टीम से बाहर रखा गया और इस बार उप-कप्तान होने के बावजूद.
मिडिलऑर्डर में अनुभव की कमी होगी दूर
ये बात तो तय है कि रहाणे लंबे समय के लिए कोई समाधान नहीं है लेकिन इंग्लैंड में मध्यक्रम में अनुभव की कमी के कारण,क्या वह एक सही विकल्प हैं? साई सुदर्शन, यशस्वी जायसवाल और करुण नायर या सरफराज खान या किसी और बल्लेबाज के होने से भारत की बल्लेबाजी अनुभवहीन और कमजोर बनी रहेगी . रहाणे ने इंग्लैंड में खेले 10 टेस्ट में 2 शतक और 2 अर्धशतक की मदद से 592 रन बनाए है. खराब सीरीज का मतलब WTC चक्र की बहुत खराब शुरुआत होगी और इससे भारत को नुकसान हो सकता है. अब गेंद सेलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट के पाले में है और अब उनको ये तय करना है कि एक अनुभव वाला मिडिल ऑर्डर का बल्लेबाज टीम के साथ जोड़ा जाए या जिस राह पर वो आगे बढ़े है उस पर ही वो चलते रहे.
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