Last Updated:April 30, 2025, 15:44 ISTकोरबा शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर, कोरकोमा गांव में अक्ति का त्योहार एक अनूठे अंदाज में मनाया गया. ढोल-नगाड़ों की थाप पर गांव के लोग देवस्थान पर इकट्ठा हुए. गांव के मुख्य बैगा (पुजारी) ने सभी इष्ट देवताओं का आह…और पढ़ेंX
अक्षय तृतीयाहाइलाइट्सकोरकोमा गांव में अक्ति का त्योहार अनूठे अंदाज में मनाया गया.पूजा के बाद ग्रामीण कृषि कार्य की शुरुआत करते हैं.अक्ति का त्योहार प्रकृति और कृषि के प्रति सम्मान का प्रतीक है.कोरबा:- अक्षय तृतीया, जिसे छत्तीसगढ़ में अक्ति के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है. पूरे देश में इसे धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में इसका रंग कुछ अलग ही होता है. कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र में अक्ति का नजारा ऐसा है, जो आपको जड़ों से जोड़े रखता है.
कोरबा शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर, कोरकोमा गांव में अक्ति का त्योहार एक अनूठे अंदाज में मनाया गया. ढोल-नगाड़ों की थाप पर गांव के लोग देवस्थान पर इकट्ठा हुए. गांव के मुख्य बैगा (पुजारी) ने सभी इष्ट देवताओं का आह्वान किया. इस पूजा का महत्व यह है कि इसके बाद ग्रामीण कृषि कार्य की शुरुआत करते हैं.
आने वाली फसल के लिए समृद्धि का प्रतीकयह पूजा केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और कृषि के प्रति सम्मान का प्रतीक है. इस पूजा में प्रतीकात्मक रूप से लकड़ी के हल बनाए जाते हैं. गांव के दो बच्चों को बैल बनाया जाता है, फिर बैगा खुद किसान बनते हैं और पूजा स्थल पर जुताई करते हैं. इस दौरान बैगा धान का छिड़काव भी करते हैं, जो आने वाली फसल के लिए समृद्धि का प्रतीक है.
इस दृश्य को देखकर ऐसा लगता है मानो समय ठहर गया हो. आधुनिकता से दूर, गांव के लोग अपनी परंपराओं को संजोए हुए हैं. बच्चे बैल बनकर खुशी से दौड़ते हैं, मानो वे खेतों में काम कर रहे हो. बैगा के चेहरे पर एक संतोष का भाव होता है, जैसे वे आने वाली फसल के लिए आशीर्वाद दे रहे हों.
परंपराएं आधुनिकता से ज्यादा मजबूतअक्ति का यह त्योहार कोरबा के वनांचल क्षेत्र में सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक उत्सव भी है. यह लोगों को एक साथ लाता है, उनकी संस्कृति को जीवित रखता है और उन्हें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों की याद दिलाता है. आपको यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि असली भारत आज भी गांवों में बसता है. जहां परंपराएं आधुनिकता से ज्यादा मजबूत हैं और जहां लोग आज भी प्रकृति के साथ सद्भाव में रहते हैं.
Location :Korba,ChhattisgarhFirst Published :April 30, 2025, 15:38 ISThomechhattisgarhकोरबा के अक्षय तृतीया का अनूठा रंग; जब बच्चे बने बैल और किसान बने बैगा
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