Last Updated:May 13, 2025, 15:55 ISTमहेंद्र सिंह धोनी ने एक ऐसी प्रथा शुरु की जिसको आज के दौर में हर क्रिकेटर अपना रहा है वो फिर चाहे रोहित शर्मा हो या विराट. धोनी ने जब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा तो एक गाने के साथ उन्होंने अपना मैसेज स…और पढ़ेंमैदान की जगह मैसेज के जरिए क्यों ले रहे बड़े खिलाड़ी रिटायरमेंटहाइलाइट्सरोहित और विराट ने सोशल मीडिया पर संन्यास की घोषणा की.धोनी ने भी सोशल मीडिया के जरिए संन्यास लिया था.सचिन को मैदान से विदाई मिली, बाकी खिलाड़ियों को नहीं.नई दिल्ली. एक जमाना था जब कोई क्रिकेटर रिटायर होता था तो उसके इमोशन, फैंस का प्यार और खेल के लिए उसके योगदान को मान्यता दी जाती थी और सम्मान के साथ मैदान से विदाई होती थी. जब अंतिम मैच खेलने कोई खिलाड़ी मैदान पर उतरता था तो विरोधी टीम एक पैसेज बनाती थी और खिलाड़ी उसके बीच से निकलता था जो एक सम्मान का प्रतीक होता था. मैच के खत्म होने के बाद साथी खिलाड़ी कंधे पर उठाकर मैदान का चक्कर लगाते थे तो स्टैंड में मौजूद फैंस की आंखें नम हो जाती थी. ये होता था असली रिटायरमेंट.
आज जमाना बदल गया है अब खिलाड़ी को वो मान सम्मान लेने की चाहत या तो खत्म हो गई है या जिस संस्था को ये करना है वो पुरानी रिवायत को भूल चुका है. खेल में बढ़ते पैसे और समय के अभाव ने खिलाड़ियों के रिटायरमेंट को सोशल मीडिया तक सीमित कर दिया है. हर बात हर विशेष मौके को सोशल मीडिया पर साझा करना हमारे देश के क्रिकेटर्स का दस्तूर बन गया है. बड़े से बड़े खिलाड़ी को भी ये आसान रास्ता रास आता है. पर सवाल बड़ा ये है कि आखिर रिटायरमेंट की वो पुरानी प्रथा क्यों विलुप्त हो रही है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है.
सचिन जैसा संन्यास बाकी का क्यों नहीं ?
भारतीय क्रिकेट में अंतिम बार किसी बड़े खिलाड़ी को मैदान से संन्यास लेते सचिन तेंदुलकर को देखा गया था. वानखेड़े के मैदान पर सचिन जब अपना अंतिम टेस्ट खेलने उतरे तो मैच के पहले दिन से खेल खत्म होने तक जो माहौल था उसको शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है. मैच के अंतिम दिन जिस तरह से सचिन का पहले वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों ने इस्तेकबाल किया और फिर मैच खत्म होने के बाद पूरी टीम ने मास्टर को कंधे पर बिठाकर मैदान का चक्कर लगवाया. फिर सचिन ने मैदान पर ऐसी स्पीच दी जिसको सुनकर स्टेडियम में मौजूद दर्शक, फैंस , साथी खिलाड़ी यहां तक कि अंपायर के आखों में आंसू था. अब सवाल ये उठता है कि सचिन के बाद देश का सबसे बड़ा खिलाड़ी क्या ये सब डिसर्व नहीं करता है क्योंकि नहीं सेलेक्टर्स ये तय कर पाते कि इतने बड़े खिलाड़ी को मैसेज के जरिए नहीं मैदान से खेल को अलविदा कहें.
अनिल कुंबले और सौरव गांगुली का विदाई मैच
सचिन तेंदुलकर की तरह भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और अनिल कुंबले को भी यादगार विदाई मिली. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर में सौरव जब अपना अतिंम मैच खेलने उतरे तो मैदान पर मौजूद ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने एक लाइन में खड़े होकर दादा का सम्मान किया और अंत में हरभजन सिंह और सहवाग ने खास तौर पर सौरव को कंधे पर उठाकर मैदान का चक्कर लगाया. अनिल कुंबले ने दिल्ली के कोटला के मैदान से अपने रिटायरमेंट का ऐलान किया और तब भी इस चैंपियन गेंदबाज को मैदान पर उनकी उपलब्धियों के लिए बड़ा सम्मान मिला.
मैसेज के जरिए मैदान छोड़ना कितना सही ?
सोशल मीडिया के जरिए अपने रिटारयरमेंट को घोषणा करने वालों में बड़ा नाम महेंद्र सिंह धोनी का है जिन्होंने एक गाने के जरिए अपनी बात कहीं और मैसेज के जरिए बताया कि वो संन्यास लेने जा रहे है. धोनी ने प्रथा शुरु की उसको फॉलो करते हुए पहले रोहित और फिर 5 दिन के बाद विराट ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपने रिटायरमेंट का ऐलान किया. तीन बड़े खिलाड़ियों का ऐसे संन्यास लेना सभी को खल रहा है. फैंस के साथ साथ क्रिकेट जानकारो का ये मानना है कि ये तीनों खिलाड़ी मैदान से मान सम्मान के साथ विदाई के हकदार थे और बोर्ड को कुछ प्लान करना चाहिए था जो हुआ नहीं .
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