why new clothes worn by the dead person before cremation antim sanskar se pehle mritak ko naye kapde kyon pehnaye jate hain।मृत्यु के बाद नए कपड़े पहनाने की परंपरा: जानिए अंतिम विदाई से जुड़ी मान्यता और भावना, क्या कहते हैं पंडित जी?



Last Updated:May 05, 2025, 15:50 ISTWhy New Clothes Worn Dead Person : मृतक को नए वस्त्र पहनाने की परंपरा केवल एक रीति नहीं, बल्कि श्रद्धा, सम्मान और आत्मिक विश्वास से जुड़ी हुई एक सजीव प्रक्रिया है. यह न केवल आत्मा की नई यात्रा की तैयारी है, बल्…और पढ़ेंशव को नए कपड़े पहनाने का रिवाज़हाइलाइट्समृतक को नए कपड़े पहनाना सम्मान और विदाई की भावना से जुड़ा है.नए वस्त्र आत्मा की शांति और विदाई की तैयारी का प्रतीक हैं.गरुड़ पुराण के अनुसार, आत्मा की शुद्धि के लिए नए कपड़े पहनाना जरूरी है.Why New Clothes Worn Dead Person : हमारे देश में जीवन की हर छोटी बड़ी बात से जुड़ी कुछ खास परंपराएं हैं. जन्म से लेकर मृत्यु तक, हर अवसर पर कुछ बातें पीढ़ियों से चली आ रही हैं जिनका पालन करना जरूरी माना जाता है. इन्हीं में से एक है अंतिम संस्कार से पहले मृतक को नए कपड़े पहनाना. अक्सर लोग इस बात को सिर्फ एक परंपरा मानकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन इसके पीछे कई भावनात्मक और धार्मिक कारण भी जुड़े हुए हैं. यह सिर्फ शरीर को ढंकने या सजाने की बात नहीं होती, बल्कि इसमें आत्मा की शांति और विदाई की तैयारी भी शामिल होती है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

क्यों पहनाए जाते हैं नए कपड़े?मृत व्यक्ति को नए कपड़े पहनाना, उनके सम्मान और विदाई की भावना से जुड़ा होता है. जिस तरह किसी खास मौके पर हम खुद को अच्छे कपड़ों में सजाते हैं, उसी तरह माना जाता है कि मृत्यु के बाद आत्मा एक नई यात्रा पर जाती है और उसे भी उस यात्रा के लिए तैयार करना जरूरी है.

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नए कपड़े पहनाना एक तरह से मृतक को सम्मान देने का तरीका होता है. यह दिखाता है कि परिवार और समाज उस व्यक्ति के प्रति कितनी श्रद्धा रखता है. यह भी माना जाता है कि अच्छे वस्त्र पहनाकर मृतक की आत्मा को शांति मिलती है और वह बिना किसी बंधन के आगे बढ़ पाती है.

धार्मिक मान्यता क्या कहती है?हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण को मृत्यु से जुड़ी बातों का बड़ा स्रोत माना जाता है. इसमें बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा कई अलग अलग लोकों से होकर गुजरती है. इस सफर के दौरान आत्मा को पवित्र और स्वच्छ रूप में होना जरूरी होता है. इसी कारण मृतक को नहलाने के बाद उसे नए वस्त्र पहनाए जाते हैं.

यह भी माना जाता है कि मृत्यु के समय शरीर अशुद्ध हो जाता है. उसे साफ करना और नए कपड़े पहनाना आत्मा की शुद्धि का प्रतीक है. सफेद रंग को शांति और शोक का रंग माना गया है, इसलिए कई जगहों पर मृतक को सफेद वस्त्र पहनाए जाते हैं.

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भावनात्मक और सामाजिक कारणजब कोई इंसान इस दुनिया को छोड़कर जाता है, तो उसके परिवारजन चाहते हैं कि उसकी विदाई आदर और गरिमा के साथ हो. नए कपड़े पहनाना इस भावना का प्रतीक होता है. इससे यह भाव सामने आता है कि भले ही वह इंसान अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी याद और इज्जत हमेशा हमारे दिल में बनी रहेगी. कुछ परिवारों में मृतक की पसंद के कपड़े भी पहनाए जाते हैं, ताकि उन्हें वैसा रूप दिया जा सके जैसा उन्हें जीवन में पसंद था. यह एक तरह की आखिरी श्रद्धांजलि भी होती है. इस प्रथा के माध्यम से हम यह संदेश देते हैं कि अंतिम विदाई भी उतनी ही पवित्र होनी चाहिए जितना जीवन का हर और कोई खास पल.
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